मंगलवार का दिन हनुमान जी की पूजा के लिए शुभ होता है. वहीं ज्येष्ठ मंगलवार का दिन तो और मंगलकारी हो जाता है.
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा| Edited By : प्रिंस अवस्थी
Hanuman Puja Bhog: भगवान हनुमान की पूजा करने से साधक को बल, बुद्धि और विद्या की प्राप्ति होती है और रोग-दोष दूर हो जाते हैं. वहीं कुछ ऐसे भोग हैं, जो भगवान हनुमान को बहुत पसंद हैं इन चीजों का भोग लगाने से बजरंगबली शीघ्र प्रसन्न होते हैं. जिसमें केसर-भात भी भोग में शामिल है. मान्यता है इस भोग से बजरंगबली शीघ्र प्रसन्न होते हैं. साथ ही ज्योतिष में इसके कई लाभ भी बताए गए हैं.
आज है जेष्ठ माह का आखिरी मंगलवार
मंगलवार का दिन हनुमान जी की पूजा के लिए शुभ होता है. वहीं ज्येष्ठ मंगलवार का दिन तो और मंगलकारी हो जाता है. बता दें कि आज 10 जून 2025 को ज्येष्ठ महीने का आखिरी बड़ा मंगल है. इस दिन भगवान की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी.
बजरंगबली को प्रिय हैं ये भोग
- बजरंगबली को पान का बीड़ा, गुड़-चना, लड्डू, इमरती या जलेबी आदि का भोग लगाया जाता है. इसी के साथ बजरंगबली को केसर-भात का भोग भी अत्यंत प्रिय है. केसर भात यानी केसर मिला हुआ मीठी चावल.
- ज्योतिष शास्त्र में मान्यता है कि केसर को पवित्र और शुद्ध माना जाता है. यह सौभाग्य, शक्ति और भक्ति का प्रतीक है. वही लाल रंग होने के कारण इसका संबंध मंगल ग्रह से भी होता है.
- हनुमान जी भी शक्ति और भक्ति के देवता माने जाते हैं. इसलिए आप इनकी पूजा में शनिवार या मंगलवार के दिन केसर-भात का भोग लगा सकते हैं.
मनोकामना की होती है पूर्ति
एस्ट्रोलॉजर के अनुसार, केसर भात का भोग लगाने से शारीरिक और मानसिक बल प्राप्त होता है, बजरंगबली प्रसन्न होकर मनोकामनाएं पूरी करते हैं, रोग-शोक दूर होता है, नकारात्मकता दूर रहती है, शनि और मंगल जैसे ग्रह दोष से राहत मिलती है आदि.
संकट मोचन हनुमानाष्टक । Sankatmochan Hanuman Ashtak
॥ हनुमानाष्टक ॥
बाल समय रवि भक्षी लियो तब,
तीनहुं लोक भयो अंधियारों ।
ताहि सों त्रास भयो जग को,
यह संकट काहु सों जात न टारो ।
देवन आनि करी बिनती तब,
छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो ।
को नहीं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो ॥ १ ॥
बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि,
जात महाप्रभु पंथ निहारो ।
चौंकि महामुनि साप दियो तब,
चाहिए कौन बिचार बिचारो ।
कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु,
सो तुम दास के सोक निवारो ॥ २ ॥
अंगद के संग लेन गए सिय,
खोज कपीस यह बैन उचारो ।
जीवत ना बचिहौ हम सो जु,
बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो ।
हेरी थके तट सिन्धु सबै तब,
लाए सिया-सुधि प्राण उबारो ॥ ३ ॥
रावण त्रास दई सिय को सब,
राक्षसी सों कही सोक निवारो ।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु,
जाए महा रजनीचर मारो ।
चाहत सीय असोक सों आगि सु,
दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो ॥ ४ ॥
बान लग्यो उर लछिमन के तब,
प्राण तजे सुत रावन मारो ।
लै गृह बैद्य सुषेन समेत,
तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो ।
आनि सजीवन हाथ दई तब,
लछिमन के तुम प्रान उबारो ॥ ५ ॥
रावन युद्ध अजान कियो तब,
नाग कि फाँस सबै सिर डारो ।
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल,
मोह भयो यह संकट भारो I
आनि खगेस तबै हनुमान जु,
बंधन काटि सुत्रास निवारो ॥ ६ ॥
बंधु समेत जबै अहिरावन,
लै रघुनाथ पताल सिधारो ।
देबिहिं पूजि भलि विधि सों बलि,
देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो ।
जाय सहाय भयो तब ही,
अहिरावन सैन्य समेत संहारो ॥ ७ ॥
काज किये बड़ देवन के तुम,
बीर महाप्रभु देखि बिचारो ।
कौन सो संकट मोर गरीब को,
जो तुमसे नहिं जात है टारो ।
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु,
जो कछु संकट होय हमारो ॥ ८ ॥
॥ दोहा ॥
लाल देह लाली लसे,
अरु धरि लाल लंगूर ।
वज्र देह दानव दलन,
जय जय जय कपि सूर ॥
Shri Hanuman Ji aarti | हनुमान जी की आरती
आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
जाके बल से गिरिवर कांपे।
रोग दोष जाके निकट न झांके।।
अंजनि पुत्र महाबलदायी।
संतान के प्रभु सदा सहाई।
दे बीरा रघुनाथ पठाए।
लंका जारी सिया सुध लाए।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई।
जात पवनसुत बार न लाई।
लंका जारी असुर संहारे।
सियारामजी के काज संवारे।
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।
आणि संजीवन प्राण उबारे।
पैठी पताल तोरि जमकारे।
अहिरावण की भुजा उखाड़े।
बाएं भुजा असुर दल मारे।
दाहिने भुजा संतजन तारे।
सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे।
जै जै जै हनुमान उचारे।
कंचन थार कपूर लौ छाई।
आरती करत अंजना माई।
लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई।
तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।
Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

