रामनगर मैहर जिले से जुड़कर रामनगर क्षेत्र व क्षेत्रवासियों को कितना फायदा कितना नुकसान
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
MP maihar district News: मध्यप्रदेश के मैहर जिले के गठन में, मैहर रामनगर,अमरपाटन को मिलाकर कथित विकास का खाका खींचा जा रहा है, लेकिन रामनगर तहसील के सैकड़ो ग्राम बासियो सहित नगरीय परिक्षेत्र के लोगों की मुसीबत बढ़ गई है, जिसके चलते एक तो समस्त दस्तावेजों में सुधार के लिए अनावश्यक व्यय भार श्रम व समय जाया हो रहा है वही कुछ सरकारी विभागों का काम पुराने जिले से ही चल रहा है आलम यह है कि मैहर के बाद सतना के भी चक्कर लगाने ही पड़ते है, वही अब नए कलेक्ट्रेट भवन की रूपरेखा कटनी रोड पर ग्राम धतूरा के पास बनने की खबर से क्षेत्रीय नागरिक हताश व निराश दिख रहे है, एक तो वैसे भी बाणसागर डूब विस्थापन के चलते अल्प, शिक्षा, स्वास्थ्य व अन्य सुविधा संसाधनों के सहारे दिन काट रहे ग्रामीणों को सुविधाओं के नाम पर चक्कर घिन्नी बनाने की कहानी के चलते क्षेत्रीय लोगो को जंहा आगामी दिनों में विधानसभा क्षेत्र होने का तमंगा मिल सकता है, रामनगर में आईटीआई के मात्र कुछ ट्रेड खुले है, उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों, महाविद्यालय में न तो नर्सिंग पढ़ सकते हैं, न कृषि संकाय और न ही कम्प्यूटर साइंस की कोई डिग्री या डिप्लोमा, और तो और टेक्निकल व व्यवसायिक पाठ्यक्रमों का कोई ठिकाना ही है, आर्ट, क्राफ्ट, साइंस, लिटरेचर की पढ़ाई लिखाई, प्रयोग के नाम पर कोरम पूर्ति जारी है, क्षेत्र में अब तक न तो किसानों के लिए बचे कृषि रकबे हेतु नहर की सुविधा हो पाई है और न ही स्वीकृति के बाद अब तक श्रंखला न्यायालय का शुभारंभ हो पाया है, वही सड़क सुविधाओं की बहाली भी ठीक ठाक ही है, रेल सुविधाओ के लिए क्षेत्रवासी सपने देख सकते हैं लेकिन मांग के बाद भी पूर्ति के अवसर कम ही समझ मे आते है.
सतना-मैहर के बीच हुए बंटवारे में घमासान
क्षेत्र के अधिकांश लोग जंहा सतना के पक्ष में खड़े हैं तो वहीं कुछ लोग मैहर की खूबियां गिना रहे हैं, यह बात अलग है कि देवी धाम मैहर में भीड़ बढ़ाने के लिए आम जनमानस को प्रदूषण के बीच फेक कर चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ाने के चलते कितना फायदा मिलेगा? कह नही सकते, हलांकि अमरपाटन, रामनगर क्षेत्र के विद्वान अभिभाषकों द्वारा अमरपाटन मैहर के बीच मे नवीन कलेक्ट्रेट व अन्य सरकारी भवन निर्माण के लिए प्रकल्प चलाया जा रहा है जिन्हें क्षेत्रीय नेताओ सहित आम जनता का भी भरपूर समर्थन मिलता देखा जा रहा है, अगर सरकार व प्रशासन उक्त मामले पर संज्ञान लेकर कार्यवाही नही करता है तो रामनगर व अमरपाटन क्षेत्र की जनता मैहर जिले से दूरी बना सकती है.
प्रदूषण और जंगल कटाई से कब मिलेगी निजात?
मैहर जिला बनते ही लगातार माइंस की बढ़ती संख्या, क्षेत्र में बढ़ता प्रदूषण, जिगना, खोडरी, हिनौती, उचेहरा, मर्यादपुर व अन्य ग्रामों में लगे जंगलों का सफाया, अवैध बालू, खनिज उत्खनन, बढ गया है, सीमेंट, क्रेसर कम्पनियां लगातार ब्लास्टिंग करके वन्य व जैविक पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुचा रही हैं, आधा स्टॉफ सतना तो आधा मैहर में बटनें से कार्रवाइयों के नाम पर झुनझुना आम है.
बुनियादी सुविधाओं से दूर आमजन
वैसे भी इन दिनों समाधान ऑन लाइन का कारोबार चालू है, ऑफ लाइन समस्या भले ही खड़ी हो लेकिन ऑन लाइन निपटारा होना ही चाहिए, क्योकि ग्रेडिंग सुधार करना ही है भले ही जिले की ग्राम पंचायते, नगर पंचायते, सरकारी, अस्पताल, विद्यालय, सरकारी कार्यालय, राजस्व हवन के नए-नए तरीके खोजकर विकास यात्रा में मेट्रो स्पीड से गति कर रहे हों और संबंधित अधिकारी कर्मचारी मन की बात सुनकर पूरी तरह से मन की मनमानी कर रहे हैं!
रामनगर तहसील के गांव सबसे ज्यादा प्रभावित
मैहर जिले के अंतर्गत आने वाले रामनगर तहसील के गांव सबसे ज्यादा दूरी महसूस कर रहे हैं. क्योंकि मर्यादपुर मनकहरी गांव की यदि बात की जाए तो करीब 70 किमी की दूरी सतना जिले की पड़ती थी. इन गांवों की दूरी भी लगभग मैहर जिले से भी है. ऐसे में रामनगर तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण इस बंटवारे से खासे नाजार दिखाई पड़ रहे हैं. क्योंकि उन्हें किसी प्रकार की राहत मिलती नहीं दिखााई पड़ रही है. उन्हें लंबी दूरी तय करने के बाद ही समस्याओं से जिला प्रमुख को अवगत कराना होगा.
Source : Ashok Sharma
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