फ्रांस ने स्कूलों में स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. फ्रांस के स्कूलों में 15 साल या उससे कम उम्र के बच्चों के द्वारा स्मार्टफोन इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा.
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By : DB News Update | Edited By: Supriya
France Ban Smartphones in Schools: स्मार्ट डिवाइसेज का चलन दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है. स्मार्टफोन ने जहां एक तरफ लोगों की जिंदगी को आसान बनाया है, वहीं दूसरी तरफ इसका बढ़ता इस्तेमाल लोगों की सेहत के लिए घातक साबित हो रहा है. युवा हों, बूढ़े हों, या फिर बच्चे, हर किसी को स्मार्टफोन की आदत लगती जा रहा है. बच्चों में भी मोबाइल की लत के खतरे को देखते हुए फ्रांस की सरकार ने बड़ा कदम उठाया है.
अन्य इलेक्ट्रॉनिक भी इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे
फ्रांस ने स्कूलों में स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. फ्रांस के स्कूलों में 15 साल या उससे कम उम्र के बच्चों के द्वारा स्मार्टफोन इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा. फ्रांस की सरकार ने एक प्रेस रिलीज जारी की गई है जिसमें इस बैन के बारे में बात की गई है. इसके मुताबिक, स्कूल और कॉलेजों में अब छात्र स्मार्टफोन के अलावा अन्य तरह के इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन डिवाइसेज यूज नहीं कर पाएंगे. इसमें टैबलेट्स भी शामिल हैं.
इन छात्रों को मिलेगी छूट
यह बैन स्कूल में रहने के समय तो लागू होगा ही, साथ ही साथ एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी के दौरान भी ये लागू होगा. हालांकि, मेडिकल या हेल्थ कंडीशन वाले छात्रों के लिए मेडिकल डिवाइसेज के रूप में इनका इस्तेमाल किया जा सकेगा. लेकिन इसके लिए संस्थान या स्कूल को यह साफ करना होगा कि किन परिस्थितियों और किन स्थानों पर यह अनुमति दी गई है.
बच्चों के मददगार साबित को सकता है ये फैसला
फ्रांस की सरकार द्वारा उठाए गया ये कदम बच्चों के लिए मददगार साबित हो सकता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, स्मार्टफोन लोगों की जिंदगी में कई तरह की रुकावट पैदा करने लगा है. ये उनके शारीरिक विकास, मानसिक स्थिरता, और बाहर बिताए जाने वाले समय को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है. ऐसे में जरूरी है कि बच्चों को स्मार्टफोन से जितना दूर रखा जाए, उतना बेहतर है.
नीदरलैंड्स के स्कूलों में दो साल पहले लागू स्मार्टफोन बैन का असर
नीदरलैंड्स के स्कूलों में दो साल पहले लागू स्मार्टफोन बैन का असर अब साफ दिखने लगा है. क्लासरूम, गलियारों और कैंटीन में मोबाइल के साथ स्मार्टवॉच और टेक्कनेट भी बाहर कर दिए गए हैं. स्कूल गेट पर लगे बोर्ड छात्रों को याद दिलाते हैं कि फोन सिर्फ लॉकर में रहेगा. सरकार अब इसे आगे बढ़ाते हुए 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी की वकालत कर रही है.
सुरक्षा बढ़ी, बुलिंग के मामले घटे
फोन बैन के बाद छात्रों में यह डर कम हुआ है कि कोई उनको फोटो लेकर सोशल मीडिया पर डाल देगा. शुरुआती संकेत बताते हैं कि स्कूलों में बुलिंग के मामलों में भी कमी आई है. छात्रों का कहना है कि स्क्रीन से दूरी ने उन्हें ज्यादा सामाजिक बनाया है.
कर्नाटक और आंध्रा में भी स्क्रीन पर लगाम की तैयारी
कर्नाटक सरकार ने छात्रों के लिए ‘डिजिटल रिस्पॉन्सिबिलिटी’ ड्राफ्ट पॉलिसी जारी की है. इसमें मनोरंजन के लिए स्क्रीन टाइम रोजाना एक घंटा सीमित करने और ‘चाइल्ड प्लॉन के तहत रात 7 बजे के बाद डेटा बंद करने जैसे सुझाव हैं. वहीं, आंध्र प्रदेश भी बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर सख्त नियम लाने पर विचार कर रहा है.
15 साल से छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन
मीडिया रिपोर्ट से पता चला है कि फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस कानून को ‘फास्ट-ट्रैक’ करने का अनुरोध किया है, ताकि इसे सितंबर में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से लागू किया जा सके. मैक्रों ने इस फैसले का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा, ‘हमारे बच्चों के दिमाग बिक्री के लिए नहीं हैं – न तो अमेरिकी प्लेटफार्म्स के लिए और न ही चीनी नेटवर्क के लिए. उनके सपने एल्गोरिदम द्वारा तय नहीं होने चाहिए.’ क्यों पड़ी इस सख्त कानून की जरूरत? फ्रांस की स्वास्थ्य निगरानी संस्था की हालिया रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, 12 से 17 वर्ष की आयु के लगभग 90 प्रतिशत बच्चे रोजाना इंटरनेट का उपयोग करते हैं. इनमें से 58 प्रतिशत किशोर इंटरनेट मीडिया पर सक्रिय दिखाई पड़ते हैं.

