कठौंदा के आसपास संक्रमण फैलने का खतरा, कचरे का पहाड़ खाली करने तीन महीने का अल्टीमेटम
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Municipal Corporation Jabalpur News: कठौंदा प्लांट के आसपास कई महीनों का कचरे का ढेर लगा है, इससे पूरे क्षेत्र में संक्रमण और बीमारी का खतरा बढ़ा गया है. इसी कारण निगमायुक्त ने इसे खाली करने अल्टीमेटम दे दिया है. वेस्ट टू एनर्जी प्लांट के नए संचालक कुंदन ग्रुप को 3 माह का समय दिया गया है ताकि कठौंदा प्लांट के आसपास फैले कचरे के पहाड़ को खत्म कर दिया जाए. इसी चक्कर में कुंदन ग्रुप द्वारा फुल कैपेसिटी के साथ प्लांट संचालित किया जा रहा है. विगत 10 वर्षों में पहली बार कठौंदा वेस्ट टू एनर्जी प्लांट में 11.5 मेगावॉट बिजली का उत्पादन हो रहा है. निगमायुक्त की इस सख्ती के बाद प्लांट के आसपास फैले कचरे के कुल ढेर में से लगभग 10 प्रतिशित कचरे का निपटान भी हो गया है. नगर निगम ने इसके लिए शहर से कचरा एकत्रित कर प्लांट तक पहुंचाने की दिशा में जोर शोर से काम प्रारंभ कर दिया है.
हटाई जाएंगी लैण्डफिल साइटें
अभी शहर में जगह-जगह कचरा के ढेर नजर आ रहे हैं. यानी लैंडफिल साइटें लगतार बढ़ती जा रही हैं. कठौंदा प्लांट तक कचरा पहुंच ही नहीं रहा है, जबकि “वेस्ट-टू-एनर्जी’ प्लांट (कचरा से बिजली बनाने के संयंत्र) का जीर्णोद्धार अभी हाल ही में कराया गया है. इस पर करीब 30 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं. निगम अिधकारियों के मुताबिक प्लांट में कचरा निपटान की वृद्धि की गई है, जिसके बाद अब हर दिन 900 टन कचरे की खपत हो सकती है. इससे शहर का ज्यादा से ज्यादा कचरा प्लांट पहुंचेगा और स्वच्छता नजर आने लगेगी.
कचरे के ढेर से आसपास फेल रहा था संक्रमण
वेस्ट टू एनर्जी प्लांट करीब 3 माह तक बंद रहा। इस दौरान न सिर्फ शहर का बल्कि आसपास के निकायों का कचरा भी प्लांट में पहुंचता रहा. हालात ये हो गए थे कि प्लांट में कचरे का पहाड़ खड़ा हो गया था. कचरे से उठने वाली बदबू और गंदगी से आसपास के क्षेत्र में रहने वाले लोगों में संक्रमण और बीमारी का खतरा बढ़ने लगा था. इतना ही नहीं कचरा के प्लांट में घुसने वाले जानवरों में भी संक्रमण का खतरा बढ़ रहा था. इसी वजह से जैसे ही प्लांट फिर से शुरू हुआ, निगमायुक्त ने उसे पूरी क्षमता से चलाकर कचरे का निपटान करने के निर्देश दिए हैं.
एस्सल ग्रुप से अधिग्रहित किया गया है प्लांट
कठौंदा में एस्सल ग्रुप ने कचरे से बिजली बनाने का प्लांट स्थापित किया था, लेकिन इस कंपनी के द्वारा न तो शहर से कचरे का पूरी तरह से उठाव कराया गया और न ही कचरे से बिजली बनाई गई. मुनाफाखोरी के फेर में फंसी एस्सल ग्रुप कंपनी ने बैंक का कर्ज भी समय पर चुकता नहीं किया, जिसके कारण एस्सल ग्रुप से यह प्लांट बैंक ने अधिग्रहण कर लिया और यह प्लांट एनसीएलटी के माध्यम से कुंदन ग्रीन एनर्जी के हवाले कर दिया गया.
500 टन की जगह 900 टन कचरे का निपटान करने का दावा
वेस्ट टू एनर्जी प्लांट का अपग्रेडेशन किए जाने के बाद इस प्लांट की क्षमता में वृद्धि किए जाने का दावा किया जा रहा है. एस्सल ग्रुप अभी तक 450 से 500 टन कचरे का निपटान करने का दावा करता था, लेकिन प्लांट का जीर्णोद्धार होने के बाद इसकी क्षमता 900 टन कचरे का निपटाने की बताई जा रही और इसकी लाइफ भी 20 साल बढ़ गई.
फैक्ट फाइल
- > 30 करोड़ रुपए की लागत से कुंदन ग्रुप कम्पनी ने कठौंदा वेस्ट टू एनर्जी प्लांट का जीर्णोद्धार कराया है।
- > 20 साल प्लांट की आयु बढ़ने का दावा किया जा रहा है।
- > 900 टन प्लांट में कचरा जलाने की क्षमता वृद्धि हुई है।
- > 450 टन अभी तक कठौंदा प्लांट में कचरा निष्पादन करने की क्षमता थी।
- > 11.6 मेगावाॅट बिजली उत्पादन क्षमता हो गई है।
- > 6.39 रुपए प्रति यूनिट की दर से एमपी पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी को बिजली बेची जा रही है।
- > 2016 में एस्सल ग्रुप द्वारा म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट (एमएसडब्ल्यू) वेस्ट टू एनर्जी प्लांट की स्थापना की गई थी।
बिना खर्च किए कचरे के ढेर से मिलेगी मुक्ति
कठौंदा में लगे कचरे के ढेर को खत्म करने की दिशा में अभी कठौंदा वेस्ट टू एनर्जी प्लांट को पुन: प्रारंभ कराया गया है, जिस पर नगर निगम की राशि भी खर्च नहीं हुई है. कठौंदा के आसपास लगे कचरे के ढेर को भी समाप्त करने का बीड़ा उठाया गया है. ठेका कंपनी को 3 माह का अल्टीमेटम दिया गया है ताकि कठौंदा के आसपास लगे कचरे के ढेर समाप्त हो जाएं.
रामप्रकाश अहिरवार, आयुक्त ननि

