नेपाल की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई है और फ्रांस में भी लोग सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मैक्रों सरकार ने उनके लिए कोई काम नहीं किया. लोग जीवनस्तर में सुधार को लेकर सरकार से उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन खराब वित्तीय प्रबंधन स्थिति बिगाड़ कर रहा है.
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By : डीबी न्यूज अपडेट | Edited By: प्रिंस अवस्थी
France Violence News: नेपाल में लगी आग अभी पूरी तरह से ठंडी भी नहीं हुई है और दूसरे दिन अब फ्रांस में बवाल मच गया है. सैकड़ों की संख्या में लोग सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं. राजधानी पेरिस में बुधवार (10 सितंबर) को आगजनी और तोड़फोड़ की कई घटनाएं हुईं. फ्रांस मीडिया ‘रॉयटर्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांस में प्रदर्शनकारियों ने सड़कें जाम कर दीं. कचरे के डिब्बे जलाए और पुलिस के साथ झड़प भी की.
दरअसल फ्रांस के लोग राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के खिलाफ प्रदर्शन के लिए सड़क पर उतरे हैं. इन प्रदर्शनों की शुरुआत सोशल मीडिया पर ‘Block Everything’ के आह्वान से हुई और लोग अब संगठित होकर विरोध-प्रदर्शन को उतर आए हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मैक्रों सरकार ने उनके लिए कोई काम नहीं किया. लोग जीवनस्तर में सुधार को लेकर सरकार से उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन खराब वित्तीय प्रबंधन स्थिति बिगाड़ कर रहा है. लोग प्रस्तावित बजट कटौती की वजह से भी गुस्से में हैं.
दर्जनों प्रदर्शनकारियों को किया गया गिरफ्तार
रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा बलों को देश भर में तैनात कर दिया गया है. प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को जाम कर दिया है. हालांकि, फ्रांस अभी तक पूरी तरह बंद नहीं है. सुरक्षा बलों की तैनाती के बाद दर्जनों प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है. इस दौरान पुलिस के साथ प्रदर्शनकारियों की झड़प भी हुई है.
हाल ही में प्रधानमंत्री बायरो को छोड़ना पड़ा था पद
दरअसल संसद ने दो दिन पहले ही प्रधानमंत्री फ्रांस्वा बायरो को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटा दिया था. वे देश के बढ़ते कर्ज को काबू करने को लेकर काम नहीं कर पा रहे थे. फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने मंगलवार (9 सितंबर) को सेबास्टियन लेकोर्नू को देश का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया था. वे दक्षिणपंथी राजनीति से जुड़े थे, लेकिन 2017 में राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने मैक्रों का साथ दिया था.
फ्रांस में दंगे और अशांति
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा प्रधानमंत्री पद के लिए अपने नए उम्मीदवार की घोषणा के एक दिन बाद ही पूरे फ्रांस में दंगे और अशांति फैल गई है। मैक्रों पर अपने पद से इस्तीफा देने का दबाव बढ़ने के साथ ही, पेरिस में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहा है। फ्रांकोइस बायरू के पद से हटने के बाद, राष्ट्रपति मैक्रों ने अपने करीबी सहयोगी सेबेस्टियन लेकोर्नु को फ्रांस का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया।.
200 लोग गिरफ्तार
बुधवार को ‘ब्लॉकन्स टाउट’ यानि (सब कुछ रोको) आंदोलन पेरिस की सड़कों पर फैल गया। प्रदर्शनकारियों ने सड़कें जाम कर दीं और बसों में आग लगा दी। गृह मंत्रालय के अनुसार, इस अशांति के बीच कम से कम 200 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस विरोध प्रदर्शन की वजह से रेलवे और बिजली लाइन को काफी नुकसान पहुंचा है।
फ्रांस में 80,000 सुरक्षा बल तैनात
फ्रांस के गृह मंत्री ब्रूनो रिटेलो ने विरोध प्रदर्शनों की निंदा की और आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी देश में ‘विद्रोह का माहौल’ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। पूरे फ्रांस में लगभग 80,000 सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं, जिनमें से 6,000 पेरिस में तैनात हैं।
मैक्रों पर इस्तीफे का दबाव
साल 2022 में दोबारा चुने जाने के बाद से फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों पर इस्तीफा देने का भारी दबाव है। बुधवार के विरोध प्रदर्शन में भी इसी तरह की मांग की गूंज सुनाई दे रही है। पिछले तीन वर्षों में फ्रांस में कई विरोध प्रदर्शन हुए हैं जिनमें राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग की गई है।
साल 2023 में 17 वर्षीय नाहेल मेरजौक की दो पुलिस अधिकारियों के साथ मुठभेड़ में मौत के बाद फ्रांस में देशव्यापी अशांति और दंगे हुए। इसके अलावा, पेंशन में सुधारों को लेकर भी देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हुआ।
साल 2024 में फ्रांसीसी किसानों ने हड़ताल की और कम खाद्य कीमतों, डीजल के लिए राज्य सब्सिडी में प्रस्तावित कटौती के साथ यूरोपीय संघ और मर्कोसुर के बीच मुक्त व्यापार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

