मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन 4 दिसंबर को त्रिपुर भैरवी जयंती मनाई जाएगी. आइए जानते हैं त्रिपुर जयंती की तारीख, शुभ मुहूर्त और व्रत कथा.
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Tripura Bhairavi Jayanti 2025: हिंदू धर्म में नौ देवियों में मां भैरवी भी शामिल हैं. इनकी पूजा-अर्चना करने वाले भक्त की सारे दु:ख-दर्द मिट जाते हैं. मां भैरवी की पूजा सच्चे मन से जो भी भक्त करता है. उसे सफलता मिलना निश्चत है. इसलिए भक्तों को शुद्धता का ध्यान रखते हुए इस देवी का व्रत, पूजन और आराधना करना चाहिए. इस वर्ष मां भैरवी का पर्व कब पड़ रहा है? इसकी तारीख आने से पहले मां भैरवी की पूजा में लगने वाली आवश्यक वस्तुओं को एकत्रित कर लेना चाहिए. 2025 में भैरवी जयंती मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन मनाई जाएगी. बतादें कि मां दुर्गा की 10 महाविद्याओं में से 5वीं महाविद्या मां त्रिपुर भैरवी है. मां त्रिपुर भैरवी की पूजा अर्चना करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्ति होती है. करियर में सफलता मिलती है.
जिस पर मां की कृपा हो जाए, उसके जीवन से तमाम तरह की समस्या दूर होती चली जाती है.
कब है त्रिपुर भैरवी जयंती?
हिंदू पंचांग के अनुसार, त्रिपुर भैरवी जयंती के लिए मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 4 दिसंबर 2025, गुरुवार सुबह 8 बजकर 37 मिनट से शुरू होगी. वही इस तिथि का समापन अगले दिन 5 दिसंबर 2025 को सुबह 04 बजकर 43 मिनट पर होगा. पूर्णिमा के चंद्रदोय के मुताबिक, त्रिपुर भैरवी जयंती 4 दिसंबर 2025 गुरुवार के दिन मनाई जाएगी.
त्रिपुर भैरवी जयंती का शुभ मुहूर्त
त्रिपुर भैरवी जयंती आने वाले 4 दिसंबर के दिन ब्रह्म मुहूर्त 5 बजकर 10 मिनट से लेकर 06 बजकर 04 मिनट तक रहेगा. ऐसे में यह समय स्नान करने के लिए शुभ है. वहीं दिन का सबसे शुभ समय अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 50 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक है.
वहीं निशिताकाल में पूजा के लिए शुभ समय रात 11 बजकर 45 मिनट से लेकर 12 बजकर 39 मिनट तक है. त्रिपुर भैरवी जयंती के मौके पर तंत्र-मंत्र की सिद्धि के लिए यह समय सबसे उत्तम माना जाता है.
रवि-शिव सहित 3 शुभ योगों का निर्माण
हिंदू पंचांग के अनुसार त्रिपुर भैरवी जयंती के मौके पर 3 शुभ योग का निर्माण हो रहा है. जिसमें रवि योग, शिव योग और सिद्ध योग शामिल हैं. जहां रवि योग सुबह 6 बजकर 59 मिनट से लेकर दोपहर 02 बजकर 45 मिनट रहेगा. शिव योग सुबह से लेकर दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक है, उसके बाद बाद से सिद्ध योग बनेगा.
शिव योग का मुहूर्त साधना, जप, तप के लिए बेहतर है, जबकि सिद्ध योग में किए कार्य सफलता दिलाते हैं. त्रिपुर भैरवी जयंती के मौके पर कृत्तिका नक्षत्र से लेकर दोपहर 02 बजकर 45 मिनट तक है, उसके बाद रोहिणी नक्षत्र बनेगा.
क्या है पौराणिक कथा?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाकाली को एक बार मन में फिर से गौर वर्ण को अपनाने का विचार आया तो वो कैलाश से कहीं और चली गईं.
जब शिवजी ने देखा कि महाकाली उनके पास नहीं हैं तो उन्होंने नारद मुनि से पूछा, तो नारद मुनि ने कहा कि, माता काली सुमेरु पर्वत के उत्तर दिशा में हैं.
शिवजी की आज्ञा पाकर नारद मुनि देवी के सामने शादी का प्रस्ताव रखते हैं. इससे देवी नाराज हो जाती हैं और उसी समय उनके शरीर से देवी भैरवी प्रकट हुई. तंत्र शास्त्र के अनुसार, देवी त्रिपुरा भैरवी मां काली का उग्र रूप है.
पूजा का विधान
- मां भैरवी की पूजा में शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
- स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनकर पूजा करना चाहिए.
- मां की आराधना में पूजन सामग्री एकत्रित करके पहले से रख लेना चाहिएङ
- पूजा में बैठने के बाद बार-बार अशुद्ध स्थान से नहीं गुजरना चाहिए.
- मां भैरवी का ध्यान सच्चे मन से करना चाहिए.
- पूजन में वघ्न उत्पन्न न हो और किसी प्रकार की अशुद्ध वस्तु आसपास नहीं होना चाहिए.
- पूजन के समय बिना स्नान के कोई भी भक्त पूजन के आसपास न आए.
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