नगर निगम के राजस्व अधिकारी ने टैक्स कलेक्शन के लिए बनाया नया प्लान, जलकर, संपत्ति, स्वच्छता कर वसूलने के लिए अलग-अलग टीम बनाई
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Municipal Corporation Jabalpur News: नगर निगम के राजस्व अधिकारी टैक्स वसूली के नाम पर आम जनता पर डंडा चलाने पर उतारू हैं. अभी तक संपत्तिकर, जलकर की वसूली एक साथ होती थी, डोर टू डोर कचरा कलेक्शन करने के लिए दबाव नहीं बनाया जाता था, क्योंकि नगर निगम शहर के किसी भी हिस्से से डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन नहीं नहीं कर पा रहा था, लेकिन अब नए अिधकारियों ने शहरवासियों से टैक्स वसूली का नया पैंतरा चला है. उनके द्वारा कभी जलकर का अलग से नोटिस भेजकर दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है तो अब डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के नाम पर अलग से मांग पत्र भेजने की तैयारी है. शहरवासियों की जल समस्या का सुधार हुआ है कि नहीं या फिर कचरा कलेक्शन बराबर हो रहा है कि नहीं, इससे अिधकारियों को कोई सरोकार नहीं है. केवल टैक्स वसूली से लेना देना है. तभी तो साल के अंत में करीब 2 लाख डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के मांग पत्र छपवाए गए हैं और उनका वितरण स्वास्थ्य विभाग के द्वारा किया जाना सुनिश्चित किया गया है.
शहर में 2016 में हुई थी शुरुआत
डोर टू डोर टू कचरा कलेक्शन की शुरुआत शहर में 2016 में हुई थी. उसी दौरान यह तय हो गया था कि हर घर से यूजर चार्ज के रूप में एक रुपए और दुकानों से दो रुपए प्रतिदिन लिया जाएगा, लेकिन निगम ने अभी तक इसकी वसूली पर ध्यान ही नहीं दिया था. इसका मुख्य कारण डोर टू डोर कचरा कलेक्शन की व्यवस्था का बेपटरी होना था, लेकिन अधिकारी लोगों से इसका पैसा वसूलने की हिम्मत ही नहीं दिखा सके. बीच-बीच में जरूर जब लोग संपत्तिकर की एनओसी लेने आते हैं तब उनसे दबाव बनाकर जरूर यूजर चार्ज भी वसूला जाता है, लेकिन अब नगर निगम ने यूजर चार्ज के मांग पत्र छपवा तो लिए हैं, लेकिन बटेंगे कब यह किसी को नहीं पता. राजस्व विभाग के अधिकारियों को भी इसकी जानकारी नहीं है. मांग पत्रों को लेकर वे भी असमंजस में हैं.
मांग पत्रों का वितरण कब होगा पता नहीं?
डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के मांग पत्र लाखों रुपए की लागत से छाप तो लिए हैं, लेकिन उनका वितरण कब किया जाएगा? इसकी कहीं कोई सुगबुगाहट नगर निगम के गलियारे में दिखाई नहीं पड़ रही है, जबकि 31 मार्च से पहले शहर भर से टैक्स कलेक्शन किया जाना है. इसके लिए एक से दो माह पहले टैक्स वसूली के नोटिस का वितरण हो जाना चाहिए, लेकिन नगर निगम के राजस्व विभाग में 2 लाख डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन टैक्स के मांग पत्र छपकर रखे हैं, उनके वितरण की प्लानिंग अभी तक नहीं बनी है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि छापे गए मांग पत्र आम आदमी तक कब पहुंचेंगे और टैक्स का कलेक्शन कब किया जाएगा या फिर इतनी तादात में छापे गए मांग पत्र के नाम पर किसी एजेंसी को उपकृत किया गया है, यह समझ से परे है.
3 टाइम तो क्या एक बार भी नहीं पहुंच पा रहीं कचरा कलेक्शन गाड़ियां
नगर निगम के द्वारा डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन करने के लिए सुबह, दोपहर और शाम 3 टाइमिंग निर्धारित की गई थी. उसी के आधार पर मकान-दुकान के लिए अलग-अलग टैक्स वसूली के रेट निर्धारित किए गए थे. रहवासी मकान मालिक से 360 रुपए और कामर्शियल स्पॉट से 720 रुपए टैक्स का निर्धारण किया गया था, लेकिन शहर के किसी भी हिस्से में डोर-टू-डोर की गाड़ियां जब नियमित नहीं पहुंच रही हैं तो किस बात का टैक्स दिया जाए, यह सबसे बड़ा सवाल है.
आरएफआईडी चिप के नाम पर फूंके थे 6 करोड़
डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन की मॉनिटरिंग के नाम पर स्मार्ट सिटी जबलपुर के अधिकारियों ने 6 करोड़ रुपए की लागत से आरएफआईडी चिप का प्रोजेक्ट लांच किया था. इनके माध्यम से यह जानकारी मिलनी थी कि कचरा गाड़ियां मकान-दुकान के पास पहुंची है या फिर नहीं. पूरा सिस्टम ऑनलाइन होना था, लेकिन यह प्रोजेक्ट लांच होने के पहले ही गर्त में पहुंच गया. इस प्रोजेक्ट के नाम पर केवल खाईबाजी हुई. जनता को किसी प्रकार का फायदा नहीं हुआ.
2 लाख घरों से कचरा कलेक्शन की मॉनिटरिंग तक नहीं
नगर निगम स्वास्थ्य विभाग के द्वारा कचरा उठाने के लिए डोर-टू-डोर कलेक्शन गाड़ियां लगाई गईं हैं. इन गाड़ियों के माध्यम से शहर से प्रतिदिन कचरा कलेक्शन हो रहा या नहीं, इसकी मॉनिटरिंग करने की किसी भी स्तर पर व्यवस्था नहीं है. इतना ही नहीं 2 लाख घरों से कचरा कलेक्शन के लिए नगर निगम के पास पर्याप्त गाड़ियों तक की व्यवस्था नहीं है. इसके बाद भी राजस्व अधिकारियों ने आनन-फानन में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के 2 लाख मांग पत्र छपवा लिए हैं.

