चैत्र नवरात्रि 2026 की अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन, हवन, मां महागौरी और माता सिद्धिदात्री की पूजा, भोग, उपाय, नियम की संपूर्ण जानकारी.
Source : DB News Update
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Chaitra Navratri Maha Ashtami Navami 2026: चैत्र नवरात्रि का उत्सव संस्कारधानी के हर मठ-मंदिर में देखने को मिल रहा है. नरसिंह मंदिर शास्त्रीब्रिज गोरखपुर में प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी संपूर्ण श्रीरामचरित मानस का पाठ किया जा रहा है. कालीधाम भटौली में सैकड़ों कलश स्थापना की गई है. त्रिपुर सुंदरी मंदिर में घट स्थापना के साथ देवी पूजन किया जा रहा है. बंगलामुखी मंदिर सिविक सेंटर में भी कलश स्थापना और जवारा बोया गया है. इसके अलावा हिंदू धर्म को मानने वाले लोग चैत्र नवरात्रि पर व्रत रखते हैं और अष्टमी के दिन कन्यापूजन और भोजन भण्डारे का आयोजन कर रहे हैं. लेकिन उन्हें कन्या पूजन, हवन, कुलदेवी की पूजा आदि की जानकारी नहीं होती है. ऐसे भक्तों के लिए इस लेख में हम यह बताने जा रहे हैं कि श्रीमद् देवी भागवत पुराण और मार्कण्डेय पुराण में नवरात्रि का वर्णन विस्तार से मिलता है. महाष्टमी और महानवमी पर व्रत कर माता का पूजन करने वालों को 9 दिन की पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है. इस साल चैत्र नवरात्रि की अष्टमी 26 मार्च को है. वहीं महानवमी 27 मार्च 2026 को है. ऐसे में कन्यापूजन कब करें? इस पर किसी को कोई भ्रांति नहीं होना चाहिए. आइए बताते हैं चैत्र नवरात्रि की महाष्टमी तिथि पर पूजन-भण्डारे की सही जानकारी…
चैत्र नवरात्रि की महाष्टमी तिथि – 25 मार्च 2026, दोपहर 1.50 – 26 मार्च 2026, सुबह 11.48
चैत्र नवरात्रि की महानवमी तिथि – 26 मार्च 2026, सुबह 11.48 – 27 मार्च 2026
अष्टमी और नवमी तिथि का महत्व
देवी पुराण में वर्णन मिलता है कि नवरात्रि की अष्टमी और नवमी पर देवी की शक्ति अपने पूर्ण प्रभाव में प्रकट होती है. दुर्गाष्टमी को वह दिन माना जाता है जब देवी ने असुरों का संहार कर धर्म की रक्षा की थी. विशेष रूप से यह दिन महिषासुर मर्दिनी के रूप मानने का महत्व है. महाष्टमी पर देवी की आराधना करने वालों को शत्रु, भय, रोग, दोष से मुक्ति मिलती है. वहीं पुराणों में वर्णित है कि जो व्यक्ति महानवमी के दिन एकाग्र भाव से देवी की पूजा करता है, उसे करोड़ों यज्ञों के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है.
महाष्टमी पर महागौरी की पूजा का महत्व
मां महागौरी, देवी दुर्गा का आठवां अवतार हैं, जो पवित्रता, शांति और दिव्य करुणा का प्रतीक हैं. भक्तों को आंतरिक कष्टों जैसे क्रोध, ईर्ष्या या उदासी जैसी पीड़ा और नकारात्मक भावनाओं से मुक्ति मिलती है, पाप दूर होते हैं और वे शांति और सुकून भरे जीवन को अपनाते हैं. मां महागौरी की ऊर्जा आपके जीवन में प्रकाश और सकारात्मकता लाने में सहायक होती है.
महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा का महत्व
मां सिद्धिदात्री नवरात्रि के नौवें दिन पूजी जाने वाली दुर्गा माँ का नौवां और अंतिम रूप हैं. उनका नाम संस्कृत के दो शब्दों “सिद्धि” यानी अलौकिक शक्तिया और “दात्री” (दान करने वाली) से मिलकर बना है. वह दिव्य माता हैं जो अपने भक्तों को सिद्धियाँ प्रदान करती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं.
कन्या पूजन
मान्यता अनुसार अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन किया जाता है. नौ कन्याओं (2 ले 10 साल तक की कन्या) को आमंत्रित कर उनकी पूजा की जाती है. उन्हें हलवा, पूरी, चना का भोजन कराते हैं और उपहार भेंट किए जाते हैं. मान्यता है कि इसके बिना नवरात्रि का पूजन अधूरा रहता है.
दुर्गा अष्टमी 2026 शुभ मुहूर्त
जो लोग आज 26 मार्च को दुर्गा अष्टमी का व्रत रखने की सोच रहे हैं, उनके लिए शुभ मुहूर्त जानना ज़रूरी है:
- चैत्र की शुरुआत शुक्ल अष्टमी तिथि: बुधवार, 25 मार्च, दोपहर 1:50 बजे
- चैत्र की समाप्ति शुक्ल अष्टमी तिथि: गुरुवार, 26 मार्च, सुबह 11:48 बजे
- शुभ-उत्तम मुहूर्त: सुबह 06:18 बजे से सुबह 07:50 बजे तक
- लाभ-उन्नति मुहूर्त: दोपहर 12:27 बजे से दोपहर 01:59 बजे तक
आज नवरात्र का आठवां दिन, मां गौरी की ऐसे करें पूजा?
चैत्र नवरात्रि का आज आठवां दिन है. दुर्गा अष्टमी पर मां महागौरी की पूजा के साथ कन्या पूजन का भी विधान बताया गया है. माता को अष्टमी पर नारियल का भोग चड़ाना शुभ माना जाता है. इसके अलावा आज के दिन गुलाबी रंग के कपड़े पहनना शुभ है और साथ ही मां दुर्गा के किसी भी मंत्र का जाप करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है.
शुभ योगों में महाष्टमी
2026 में दुर्गा अष्टमी का दिन आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना गया है, क्योंकि इस दिन तीन विशेष योगों का संगम हो रहा है-
- रवि योग: यह योग बाधाओं को दूर कर कार्यों में सफलता दिलाता है.
- सर्वार्थ सिद्धि योग: इस मुहूर्त में किया गया कोई भी कार्य सिद्ध और सफल होता है.
- शोभन योग: यह योग सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि करने वाला माना जाता है.
पूजा का लाभ: इन शुभ योगों के बीच मां दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों की आराधना करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि जीवन में सुख, ऐश्वर्य और मनोवांछित फलों की प्राप्ति भी होती है.
कन्या पूजन की सही विधि क्या है?
- कन्याओं के सबसे पहले चरण स्वच्छ जल से धोएं और उन्हें ऊंचे आसन पर बैठाएं.
- कन्याओं के माथे पर कुमकुम का तिलक लगाएं और हाथ में रक्षा सूत्र (कलावा) बांधें.
- प्रथम भोग सबसे पहले तैयार प्रसाद का एक अंश मां दुर्गा की प्रतिमा के समक्ष अर्पित करें.
- श्रद्धापूर्वक कन्याओं को भोजन प्रसाद परोसें. ध्यान रहे कि कन्याओं के साथ एक छोटा बालक (बटुक भैरव) भी जरूर हो.
- भोजन के उपरांत उन्हें उपहार, सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा और फल देकर उनके पैर छुएं और आशीर्वाद लें.
मां दुर्गा, मां काली की आरती
अम्बे तू है जगदम्बे काली,जय दुर्गे खप्पर वाली। तेरे ही गुण गाएँ भारती,ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥
तेरे भक्त जनो पर माता, भीर पडी है भारी।दानव दल पर टूट पड़ो माँ, करके सिंह सवारी॥
सौ-सौ सिहों से बलशाली, है अष्ट भुजाओं वाली,दुष्टों को पल में संहारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥
माँ-बेटे का है इस जग में, बड़ा ही निर्मल नाता।पूत-कपूत सुने है पर ना, माता सुनी कुमाता॥
सब पे करूणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली।दुखियों के दुखड़े निवारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥
नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना।हम तो मांगें तेरे चरणों में, इक छोटा सा कोना॥
सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली,सतियों के सत को संवारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥
चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली।वरद हस्त सर पर रख दो माँ, संकट हरने वाली॥
मां भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओं वाली।भक्तों के कारज तू ही सारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥
Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

